सोमवार, 1 अक्तूबर 2007

ब्लॉग..पर कविता

कोशिशों की
छोटी छोटी कहानियों
से बनी
एक लंबी कहानी हैं
ये ब्लॉग..
इन कहानियों में
कहीं रवीश का कस्बा है
तो कहीं
प्रियदर्शन की बातें हैं...
कहीं समीर लाल हैं
तो कहीं वाह वाह करते
संजीव तिवारी के
अल्फाज़ हैं...
राजेश रोशन के सपनों
कि कहानी हैं
ये ब्लॉग....
वाकई
कोशिशों की
छोटी छोटी कहानियों
से बनी
एक लंबी कहानी हैं
ये ब्लॉग....
रितेश गुप्ता की
भावनाएं
हैं यहां....
रवीन्द्र प्रधान के
लफ्ज़ों की मिठास
है यहां...
ढाई आखर की जुबानी
है यहां...
कोशिशों की
छोटी छोटी कहानियों
से बनी
एक लंबी कहानी हैं
ये ब्लॉग..

4 टिप्‍पणियां:

Reetesh Gupta ने कहा…

आपकी कविता पढ़कर लगा मन खुश हो गया ..बधाई ...जब भावनायें मिलती हैं तो आनंद आता ही है...आपने अपनी कविता मेरा नाम लेकर जो सम्मान मुझे दिया है उसके लिये हार्दिक आभार

Gyandutt Pandey ने कहा…

अच्छा है - केवल अच्छाइयां ही देखो मित्र!
अच्छा लिखते हैँ आप!

Sanjeeva Tiwari ने कहा…

वाह वाह भाई, आपको भी कह रहा हूं । आपका प्रयास काबिले तारीफ है । धन्‍यवाद

'आरंभ' छत्‍तीसगढ की धडकन

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

आपकी कविता है ब्लाग
एक आग है ब्लाग
पाक साफ है ब्लाग
हर तरफ है ब्लाग
सरसों का साग न सही
मक्के की रोटी है ब्लाग
राग है विहाग है
तरन्नुम की आग
है ब्लाग.