हूं लखनऊ का...लेकिन काम ने गाजियाबाद में ला पटका है...इससे पहले नोएडा में था..और उससे पहले हैदराबाद में...समय काटना किसे कहते हैं अब समझ में आ रहा है...गाजियाबाद में बिजली आती कम है जाती ज्यादा है...10 से 15 घंटे की कटौती...दिक्कत इस लिहाज से भी बड़ी है...कि बिजली और पानी पर देश की चिंता करने वाले ज्यादातर पत्रकार यहीं रहते हैं...अंदाजन पचास फीसदी से ज्यादा...लेकिन गाजियाबाद की इस दिक्कत पर मैने कभी लाइव होते नहीं देखा...और ना ही किसी अखबार में दो कॉलम से ज्यादा की खबर देखी...मर्ज बड़ा है...और मेरे मकानमालिक ने इसका इलाज भी बता दिया है...इन्वर्टर...लखनऊ में था तो इन्वर्टर के बारे में थोड़ा बहुत सुना था...हैदराबाद में कभी इसके बारे में सुनने की फुरसत नहीं मिली...नोएडा में जिस मकान में रहता था वहां मकानमालिक ने इन्वर्टर दे रखा था...मौसम का दस्तूर ही था कि इन्वर्टर की ज्यादा जरुरत नहीं पड़ा...दलालों (जिन्हे नोएडा और आसपास के इलाकों में प्रॉपर्टी डीलर के नाम से जानते हैं) ने ये बताने मे कोई कसर बाकी नहीं रखी कि मकान का भाड़ा इसलिए ज्यादा है कि क्योंकि इन्वर्टर की सुविधा है...लेकिन गाजियाबाद में जब पंखे ने हर दिन हर घंटे रुककर शहर की औकात बताई तो इन्वर्टर का मतलब समझ में आया...लेकिन फिर भी कई दिनों तक संपूर्ण क्रांति के इंतजार में बैठा रहा...लगा कि हो ना हो एक दिन गाजियाबाद के कई गजनी टाइप लोग पावरस्टेशन पर हमला बोलेंगे...बिजली के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पिटाई होगी...लोग बिजली का बिल देने से इंकार कर देगे.. अखबार और चैनल चीख चीखकर दिल्ली से सटे इलाके की दुर्दशा पर लाइव करेंगे...लेकिन क्रांति की चिंगारी उठे उससे पहले इन्वर्टर ने उस पर पानी फेर दिया...सोच रहा हूं बिजली के संकट से निपटने के लिए मैं भी इन्वर्टर ले आऊं...घर का संकट हल कर लूं...फिर देश के बिजली संकट पर खबर लिखूं...
बच्चा प्रसाद सुनार के गहने
25 मिनट पहले




5 comments:
घर का संकट हल कर लूं...फिर देश के बिजली संकट पर खबर लिखूं...
-ऐसा ही है!!
bahut hi badhiya
BAHUT SAHI LIKHE BHAI ....GAGIABAD KI BIJLI KA ANAD LE RAHA HON..
bahut sahi bataya aap ne,
mai bhi ek gaziabaad ka prani hoon
aane ke baad pata chala ki yahan to jaan chali jayegi bina light ke..
2 din hi nahi beete ki invertar lena pada..yahan aakar dekha to har 3rd shop invertor ka hai..
bhagwaan kare kalyaan is gaziabaad ka..sarkaar to kuch nai sochegi..
subodh ji
good bahut acha aur sahee lekha
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